तृप्ति प्रमाण ब्यूरो चीफ विनोद प्रसाद
पटना। महान उपन्यासकार और कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती के पावन अवसर पर खगौल स्थित प्रसिद्ध नाट्य संस्था ‘सूत्रधार’ द्वारा एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जमालुद्दीन चक स्थित संस्था के कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ कलाकारों, रंगकर्मियों और साहित्यकारों द्वारा प्रेमचंद के चित्र पर श्रद्धा-सुमन अर्पित कर किया गया।
वर्तमान दौर में प्रेमचंद के विचारों की प्रासंगिकता
संगोष्ठी का मुख्य विषय “वर्तमान समय में प्रेमचंद के साहित्य की प्रासंगिकता” रखा गया था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता चन्द्रबिंद ने कहा, “मुंशी प्रेमचंद ने अपनी कालजयी रचनाओं के माध्यम से भारतीय समाज के नग्न यथार्थ को बेहद जीवंत ढंग से प्रस्तुत किया है। उनका पूरा साहित्य मानवता, समानता और सामाजिक चेतना की अलख जगाता है।”
नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने का प्रयास
संस्था के महासचिव नवाब आलम ने संगोष्ठी के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस आयोजन का मुख्य ध्येय नई पीढ़ी को प्रेमचंद के व्यापक दृष्टिकोण और साहित्य से समकालीन संदर्भों में परिचित कराना है। वहीं उदय कुमार ने बताया कि कलाकारों के वाचन और लेखन कौशल को निखारने के उद्देश्य से संस्था लगातार ऐसे सांस्कृतिक व साहित्यिक मंच सजाती रहती है।
कैसे मिला ‘कथा सम्राट’ का नाम?
कार्यक्रम के दौरान अरुण सिंह ने प्रेमचंद के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को साझा किया। उन्होंने बताया कि मुंशी प्रेमचंद को ‘कथा सम्राट’ की उपाधि महान बांग्ला साहित्यकार शरदचंद्र चट्टोपाध्याय ने दी थी।
सर्वव्यापी और कालजयी है प्रेमचंद की रचनाएं
प्रो. प्रसिद्ध यादव ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रेमचंद का साहित्य मानव जीवन के विभिन्न अनुभवों का सजीव दस्तावेज है। उन्हें किसी जाति, धर्म या भाषा के बंधन में नहीं बांधा जा सकता; उनका साहित्य संपूर्ण मानवता की धरोहर है। सुजीत कुमार ने कहा कि प्रेमचंद को जब भी पढ़ा जाए, हर बार एक नई सोच और संवेदना का अहसास होता है।
मंच का कुशल संचालन करते हुए जयप्रकाश मिश्रा ने कहा कि प्रेमचंद के समतामूलक समाज के सपने को पूरा करना आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक और जरूरी है।
दिग्गजों की उपस्थिति
इस गरिमामयी अवसर पर विनोद शंकर मिश्रा, अनीता कुमारी, मोईन ताबिश, मोहन पासवान, संजय गुप्ता, प्रेम राज गुप्ता, इंद्रजीत सिंह, सुधीर मधुकर, मो. सादिक, अस्तानंद सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता चंदू प्रिंस, विकास कु. पप्पू, सऊद आलम, आसिफ हसन और लवकुश कुमार सहित कई गणमान्य साहित्य प्रेमी मौजूद रहे और कालजयी रचनाकार को याद किया।