वसई

वसई पूर्व की 550 एकड़ मिठागर जमीन पर अवैध कब्जे और निर्माण का आरोप, परिवर्तन संगठन ने मुख्यमंत्री से की जांच की मांग |

विरार। वसई पूर्व स्थित मौजे माणेकपुर में मिठागर विभाग की लगभग 550 एकड़ सरकारी जमीन पर कथित तौर पर अवैध अतिक्रमण, अनधिकृत भराव और रास्तों के निर्माण का गंभीर मामला सामने आया है। ‘परिवर्तन संगठन’ ने इस पूरे प्रकरण को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय जांच (High-level Probe) की मांग की है।

सर्वे नंबर 151, 152 और 153 पर भूमाफियाओं की नजर!

संगठन के कार्याध्यक्ष शिवप्रताप सिंह सोमवंशी ने मुख्यमंत्री को भेजे शिकायत पत्र में आरोप लगाया है कि माणेकपुर के सर्वे नंबर 151, 152 और 153 की सरकारी भूमि पर बड़े पैमाने पर अवैध गतिविधियां चलाई जा रही हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि मिठागर विभाग के कुछ निचले अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमाफियाओं के साथ साठगांठ हो सकती है, जिसकी वजह से इस बहुमूल्य जमीन पर कब्जा हो रहा है।

गोखिरे गांव की मंजूरियों के दम पर माणेकपुर में निर्माण?

शिकायत में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। आरोप है कि माणेकपुर से सटी ‘गोखिरे’ गांव की जमीन के कागजात और स्वीकृतियों का दुरुपयोग कर माणेकपुर की सरकारी जमीन पर ऊंची-ऊंची इमारतें खड़ी की जा रही हैं। संगठन ने यहां बन रही 20, 22 और 35 मंजिला बहुमंजिला इमारतों के मालिकाना हक, FSI, निर्माण अनुमतियों और एनओसी (NOC) की गहन जांच कराने का आग्रह किया है।

आम नागरिकों के आर्थिक नुकसान की चेतावनी

पत्र में वर्ष 2009-10 के दौरान सर्वे नंबर 152 पर बने ‘ग्रीष्मा गार्डन’ का उदाहरण देते हुए सचेत किया गया है कि यदि ऐसे अवैध निर्माणों पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में फ्लैट खरीदने वाले आम खरीदारों को भारी आर्थिक व मानसिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

संगठन की मुख्य मांगें:

  1. मिठागर विभाग की जमीन का तुरंत सीमांकन और सर्वेक्षण कर RCC फेंसिंग कराई जाए।
  2. सभी संदिग्ध और अनधिकृत निर्माण कार्यों पर तत्काल रोक लगाई जाए।
  3. कागजातों में हेरफेर पाए जाने पर दोषी डेवलपर्स, भूमाफियाओं और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
  4. पूरे मामले की जांच रिपोर्ट एक निश्चित समयसीमा के भीतर प्रस्तुत करने का आदेश जारी किया जाए।

(न्यूज़ पोर्टल: तृप्ति प्रमाण)

Sanjay Jaiswal

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