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बॉलीवुड की चकाचौंध छोड़ सोमी अली बनीं पीड़ितों की ढाल: संजय दत्त को लेकर किया बड़ा खुलासा, बयां किया ग्लैमर से समाजसेवा तक का दर्दभरा सफर |

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विशेष रिपोर्ट: साहिल यादव (तृप्ति प्रमाण)

मुंबई: पूर्व बॉलीवुड अभिनेत्री और जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता सोमी अली ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में अपने जीवन के कई अनछुए पहलुओं को उजागर किया है। उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपने छोटे लेकिन यादगार सफर से लेकर आज ग्लोबल लेवल पर मानव तस्करी के खिलाफ जंग लड़ने तक के अनुभवों को साझा किया। सोमी ने साफ शब्दों में कहा कि भले ही लोग उन्हें उनके फिल्मी करियर से जानते हों, लेकिन आज उनकी असली पहचान एक समाजसेविका के रूप में है, जो पीड़ितों के आंसू पोंछने का काम कर रही हैं।

जब कैमरे के सामने कांपती थीं सोमी, तब संजय दत्त बने मसीहा

अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए सोमी अली ने बताया कि शुरुआत में वे कैमरे का सामना करने से बेहद घबराती थीं। ऐसे कठिन समय में बॉलीवुड के ‘संजू बाबा’ यानी संजय दत्त ने उनकी मदद की। संजय दत्त ने न सिर्फ उनका हौसला बढ़ाया, बल्कि उन्हें अभिनय की बारिकियों को समझाते हुए सहज होना सिखाया। सोमी ने संजय दत्त के प्रति अपना आभार जताते हुए कहा कि उनके उस सहयोग के बिना वे कैमरे के डर पर जीत नहीं पा पातीं। उन्होंने अपने दौर के दिग्गज कलाकारों जैसे गोविंदा, ओम पुरी, सतीश शाह और जावेद जाफरी के साथ काम करने के खुशनुमा पलों को भी याद किया।

दिव्या भारती की दोस्ती और आत्मकथा में खुलेंगे कई बड़े राज

सोमी ने खुलासा किया कि बॉलीवुड के उस सुनहरे दौर की कई ऐसी अनसुनी कहानियां और राज हैं, जिन्हें वे अपनी आने वाली ऑटोबायोग्राफी (आत्मकथा) में दुनिया के सामने लाएँगी। उन्होंने उस दौर की दिवंगत सुपरस्टार दिव्या भारती के साथ अपनी गहरी दोस्ती का जिक्र भी किया। सोमी ने कहा कि दिव्या और उनके बीच भरोसे की कई ऐसी बातें थीं, जिन्हें वे सही समय आने पर ही सार्वजनिक करेंगी।

“निजी जिंदगी पर गॉसिप बंद हो, मेरे काम को देखें लोग”

पॉडकास्ट के दौरान सोमी अली का दर्द भी छलक पड़ा। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि मीडिया और लोग आज भी उनके सामाजिक कार्यों से ज्यादा उनकी पर्सनल लाइफ और अतीत के रिश्तों में दिलचस्पी लेते हैं। उन्होंने कहा कि वे सालों से घरेलू हिंसा, शोषण और मानव तस्करी (Human Trafficking) की शिकार महिलाओं को बचाने के लिए दिन-रात काम कर रही हैं, लेकिन उनके इस संघर्ष को वो पहचान नहीं मिलती जिसकी वो हकदार हैं।

सोमी ने अपनी संस्था ‘नो मोर टियर्स’ (No More Tears) का जिक्र करते हुए पीड़ितों से अपील की कि वे समाज के डर और बदनामी की परवाह किए बिना अपने हक के लिए आवाज उठाएं। इसके साथ ही उन्होंने मायानगरी में किस्मत आजमाने आने वाले युवाओं को नसीहत दी कि शॉर्टकट के बजाय कड़ी मेहनत, ईमानदारी और धैर्य को ही अपना हथियार बनाएं।

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Rajesh