विरार (तृप्ति प्रमाण) – ठाणे स्थानीय स्वराज्य संस्था निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद की एक सीट को लेकर पिछले कई दिनों से चल रही सियासी कसरतों और अटकलों पर अंततः विराम लग गया है। सोमवार को उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की उपस्थिति में शिंदे सेना के वरिष्ठ नेता रविंद्र फाटक ने अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। इस कदम के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि उक्त सीट शिंदे गुट के नियंत्रण में ही रहेगी।
अटकलों का बाजार: ठाकुर और पाटिल के नाम पर चर्चा
पिछले कुछ समय से वसई-विरार और पालघर क्षेत्र के राजनीतिक हलकों में बहुजन विकास आघाड़ी (बीवीए) के युवा नेता एवं पूर्व विधायक क्षितिज ठाकुर को उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चाएं जोर पकड़े हुए थीं। इसी क्रम में रविंद्र फाटक की बीवीए अध्यक्ष हितेंद्र ठाकुर से हुई मुलाकात ने भी राजनीतिक समीकरणों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए थे। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों ने तो ठाकुर परिवार और शिंदे गुट के बीच संभावित गठजोड़ की भी बात कही थी।
इन कयासों को उस समय और बल मिला, जब हितेंद्र ठाकुर ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि “घोड़े मैदान से दूर नहीं हैं”। इस बयान को विधान परिषद चुनाव में बीवीए की सक्रिय भूमिका के संकेत के रूप में देखा जा रहा था। हालांकि, रविंद्र फाटक के नामांकन के बाद क्षितिज ठाकुर और राजीव पाटिल दोनों के नामों पर चल रही अटकलों का पूर्ण विराम लग गया है।
बीवीए की ‘किंगमेकर’ भूमिका पर टिकी सबकी नजर
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, बहुजन विकास आघाड़ी के पास विधान परिषद चुनाव में लगभग 71 मत मौजूद हैं। इसके अलावा, अन्य छोटे दलों और निर्दलीय सदस्यों के समर्थन की भी संभावना बनी हुई है। ऐसे में बीवीए इस चुनाव में ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकती है। अब सभी राजनीतिक धड़ों की नजर इस बात पर टिकी है कि बीवीए अपने मूल्यवान मत किस उम्मीदवार के पक्ष में डालती है।
पाटिल के नाम की चर्चा भी रही गर्म
इस बीच, पालघर के सांसद हेमंत सावरा और नालासोपारा के विधायक राजन नाइक द्वारा बीवीए के पूर्व महापौर राजीव पाटिल से की गई मुलाकात भी चर्चा का विषय बनी हुई थी। इस बैठक के बाद राजीव पाटिल के उम्मीदवार बनने की भी संभावनाएं जताई जा रही थीं। लेकिन रविंद्र फाटक के आधिकारिक नामांकन के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि इस बार ठाकुर और पाटिल परिवार को विधान परिषद चुनाव की दौड़ से बाहर रखा गया है।
अब सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यही है कि बहुजन विकास आघाड़ी का समर्थन अंततः किस दिशा में जाएगा और ठाणे विधान परिषद चुनाव में उसके वोट किस उम्मीदवार की जीत का रास्ता आसान बनाएंगे। आने वाले दिनों में इस पर सियासी गलियारों में नए समीकरण बनते हुए देखे जा सकते हैं।