न्यूज़ पोर्टल: तृप्ति प्रमाण
वसई-विरार। महानगरपालिका क्षेत्र में कथित तौर पर अवैध, जर्जर और असुरक्षित इमारतों में संचालित हो रहे निजी व गैर-सरकारी स्कूलों को लेकर छात्रों की सुरक्षा पर एक बार फिर बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है। ‘राष्ट्रीय मानवाधिकार अपराध एवं भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो’ की आरटीआई विंग ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए वसई-विरार महानगरपालिका (VVMC) आयुक्त को ज्ञापन देकर तत्काल सख्त कार्रवाई की गुहार लगाई है।
फायर सेफ्टी और इमरजेंसी एग्जिट का अभाव, मंडरा रहा बड़ा खतरा
आयुक्त को दिए गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि मनपा सीमा के भीतर अनेक स्कूल ऐसे परिसरों और इमारतों में चलाए जा रहे हैं, जो बुनियादी सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करते। इन भवनों में आग से बचाव के इंतजाम (Fire Safety), आपातकालीन निकास (Emergency Exit) और संरचनात्मक मजबूती (Structural Audit) जैसी प्राथमिक सुविधाओं का घोर अभाव है। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति या दुर्घटना की सूरत में सैकड़ों मासूम विद्यार्थियों की जान जोखिम में पड़ सकती है।
MRTP की नोटिस के बाद भी कार्रवाई ठंडे बस्ते में: संजय गुप्ता
आरटीआई कार्यकर्ता संजय गुप्ता ने दावा किया है कि उन्होंने बीते 1 जून 2026 को ही नगर निगम प्रशासन को सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त उन सभी स्कूलों और भवनों की सूची सौंपी थी, जिन्हें मनपा द्वारा एमआरटीपी (MRTP) कानून के तहत अवैध घोषित कर नोटिस थमाई गई थी। गुप्ता ने सवाल उठाया कि जब कागजों पर नोटिस जारी हो चुकी है, तो फिर धरातल पर इन असुरक्षित परिसरों को सील करने या स्कूल शिफ्ट करने की प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है?
नागरिकों और सामाजिक संस्थाओं ने सेफ्टी ऑडिट की उठाई मांग
इस अति-संवेदनशील मामले में फिलहाल वसई-विरार महानगरपालिका प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक सफाई या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, स्थानीय नागरिकों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने एकसुर में मांग की है कि प्रशासन को तुरंत सभी स्कूल परिसरों का स्ट्रक्चरल व फायर सेफ्टी ऑडिट कराना चाहिए और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कदम उठाने चाहिए।