फाइबर, विटामिन और अन्य पोषक तत्वों के लिए पूरे फल को आहार में शामिल करने की सलाह
आगरा: फलों का सेवन स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन फल खाने और उसका जूस पीने के बीच पोषण के स्तर पर अंतर हो सकता है। डॉ. मीना अग्रवाल, नेचुरोपैथी, आगरा के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में फलों का जूस लेने की तुलना में पूरा फल खाना अधिक लाभकारी विकल्प हो सकता है, क्योंकि पूरे फल में फाइबर सहित कई पोषक तत्व मौजूद रहते हैं।
डॉ. मीना अग्रवाल के अनुसार, पूरे फल में घुलनशील और अघुलनशील फाइबर के साथ विटामिन, खनिज, एंटीऑक्सीडेंट्स और प्राकृतिक शर्करा मौजूद होती है। फाइबर पाचन प्रक्रिया और भोजन से मिलने वाली तृप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पूरा फल खाने के फायदे
पूरे फल को चबाकर खाने से फाइबर का सेवन होता है और पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस हो सकता है। संतुलित आहार का हिस्सा होने के कारण फल पाचन स्वास्थ्य, सामान्य पोषण और स्वस्थ जीवनशैली में योगदान दे सकते हैं।
सेब, नाशपाती और अंगूर जैसे कुछ फलों को अच्छी तरह धोकर, यदि उनका छिलका खाने योग्य और सुरक्षित हो, तो छिलके सहित खाया जा सकता है। इससे आहार में फाइबर और अन्य पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ सकती है।
जूस को सीमित रखने की सलाह
प्रेस नोट के अनुसार, फलों का जूस बनाते समय फल का कुछ या अधिकांश फाइबर अलग हो सकता है, जबकि जूस में प्राकृतिक शर्करा अपेक्षाकृत अधिक केंद्रित हो सकती है। इसी कारण जूस की तुलना में पूरा फल अधिक तृप्ति प्रदान कर सकता है।
विशेष रूप से बाजार में उपलब्ध पैक्ड जूस में अतिरिक्त शक्कर या अन्य सामग्री हो सकती है। इसलिए ऐसे पेय पदार्थों का सेवन सीमित रखना उचित माना जाता है।
यदि कोई व्यक्ति जूस लेना चाहता है तो प्रेस नोट में बिना अतिरिक्त शक्कर, बिना छाने और गूदे सहित ताजा जूस लेने की सलाह दी गई है। हालांकि, इसकी मात्रा और सेवन की आवृत्ति व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और आहार संबंधी जरूरतों के अनुसार तय की जानी चाहिए।
मधुमेह और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों में सावधानी
डॉ. मीना अग्रवाल के प्रेस नोट में मधुमेह, प्रीडायबिटीज, मोटापा, पीसीओडी, इंसुलिन रेजिस्टेंस और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोगों को जूस के सेवन को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
वहीं, किडनी रोग या डायलिसिस से गुजर रहे लोगों को पोटैशियम की मात्रा को लेकर अपने चिकित्सक या डायटीशियन से सलाह लेने की आवश्यकता हो सकती है, क्योंकि कुछ फलों में पोटैशियम की मात्रा अधिक होती है।
फलों को सेवन से पहले अच्छी तरह धोना भी जरूरी है। किसी विशेष फल से एलर्जी होने पर उसका सेवन नहीं करना चाहिए।
संतुलित आहार का हिस्सा बनाएं फल
डॉ. मीना अग्रवाल के अनुसार, मौसमी फलों के साथ हरी और रंग-बिरंगी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, नट्स और बीजों को भी संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। पर्याप्त पानी पीना और पैक्ड मीठे पेय पदार्थों का सेवन सीमित करना भी स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा हो सकता है।
डॉ. मीना अग्रवाल, नेचुरोपैथी, आगरा ने स्पष्ट किया है कि यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से है। फल या जूस किसी बीमारी का इलाज नहीं हैं। मधुमेह, किडनी रोग, पीसीओडी, हृदय रोग, बैरिएट्रिक सर्जरी या खाद्य एलर्जी जैसी स्थिति में व्यक्तिगत आहार संबंधी सलाह के लिए डॉक्टर या योग्य डायटीशियन से परामर्श लेना जरूरी है।
राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक ‘तृप्ति प्रमाण’




