जव्हार PWD के सात कार्यों के भुगतान में कथित हेराफेरी का आरोप; पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच जारी
पालघर: पालघर जिले के जव्हार स्थित सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) कार्यालय से जुड़े सात कार्यों के भुगतान में कथित अनियमितता के मामले में शिवसेना उपनेता तथा जिजाऊ कंस्ट्रक्शन के तत्कालीन संचालक निलेश भगवान सांबरे समेत कंपनी के अन्य भागीदारों और तत्कालीन अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ जव्हार पुलिस ने मामला दर्ज किया है।
मामला ₹73 लाख 13 हजार 884 रुपये की सरकारी राशि के कथित तौर पर गलत तरीके से स्थानांतरण से जुड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, यह मामला वर्ष 2014-15 में वाडा, मोखाडा, जव्हार और आसपास के क्षेत्रों में सड़क मरम्मत, गड्ढे भरने तथा नालियों की खुदाई सहित सात कार्यों से संबंधित है। ये कार्य निविदा प्रक्रिया के माध्यम से शिक्षित बेरोजगार अभियंताओं को दिए गए थे।
दस्तावेजों में कथित बदलाव कर भुगतान का आरोप
जांच से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, मूल ठेकेदारों द्वारा कार्य पूरा करने के बाद भुगतान के लिए बिल प्रस्तुत किए गए थे। आरोप है कि भुगतान प्रक्रिया के दौरान संबंधित दस्तावेजों और फॉर्म नंबर 47 में कथित तौर पर बदलाव किए गए और रिकॉर्ड में इन कार्यों को मे. जिजाऊ कंस्ट्रक्शन द्वारा किए जाने के रूप में दर्शाया गया।
रिपोर्टों के मुताबिक, 31 मार्च 2019 को ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से कुल ₹73,13,884 की राशि जिजाऊ कंस्ट्रक्शन से जुड़े बैंक खाते में स्थानांतरित की गई। इस मामले में सरकारी रिकॉर्ड और भुगतान प्रक्रिया में कथित बदलाव की जांच की जा रही है।
कार्यकारी अभियंता की शिकायत पर केस
मामले में सार्वजनिक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता संजय पांडुरंग डोंगरे की शिकायत के आधार पर जव्हार पुलिस ने मामला दर्ज किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पालघर के पुलिस अधीक्षक यतिश देशमुख ने मामले में कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
विक्रमगढ़ के भाजपा विधायक हरिश्चंद्र भोये ने भी कथित वित्तीय अनियमितता की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की थी। यह मांग मामले की जांच के संदर्भ में की गई राजनीतिक मांग के रूप में सामने आई है।
विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज
जव्हार पुलिस ने निलेश भगवान सांबरे, जिजाऊ कंस्ट्रक्शन के अन्य संबंधित व्यक्तियों तथा तत्कालीन अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कथित धोखाधड़ी, दस्तावेजों में हेरफेर, जालसाजी और आपराधिक साजिश से संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है।
मामले की आगे की जांच पुलिस उपअधीक्षक स्तर के अधिकारी को सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है। जांच के दौरान भुगतान प्रक्रिया, संबंधित दस्तावेजों, बैंक खातों और इस पूरी प्रक्रिया में शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।
राशि वापस जमा होने की भी रिपोर्ट
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, कथित अनियमितता सामने आने के बाद ₹73,13,884 की राशि सरकारी खाते में वापस जमा किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, राशि की वापसी से कथित भुगतान प्रक्रिया और उसमें शामिल व्यक्तियों की भूमिका से जुड़े सवालों की जांच समाप्त नहीं होती; इसकी वास्तविक स्थिति पुलिस और विभागीय जांच के निष्कर्षों से स्पष्ट होगी।
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। किसी आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज होना अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है।




