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पटना महावीर मन्दिर में प्रत्येक पूर्णिमा और विशेष पर्व पर होगी ‘शिखर ध्वज-पूजा’, श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी |

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पटना। मन्दिर की आध्यात्मिक ऊर्जा उसके शिखर पर लगे ध्वज पर केन्द्रित होती है। इस ध्वज का दर्शन एवं पूजन मन्दिर के सभी देवताओं की एक साथ उपासना का फल प्रदान करता है। इसी पवित्र परम्परा को और अधिक सार्थक बनाने के लिए पटना महावीर मन्दिर ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब से प्रत्येक पूर्णिमा तथा विशेष पर्वों के अवसर पर मन्दिर के मुख्य शिखर के ध्वज की विशिष्ट पूजा कर उसे बदला जाएगा।

ध्वज-पूजा की प्राचीन परम्परा

महावीर मन्दिर में वर्तमान में प्रत्येक पूर्णिमा के दिन ध्वज-पूजा कर उसे बदलने की परम्परा रही है। मन्दिर के पुरोहित भक्तों के नाम तथा गोत्र का उच्चारण कर ध्वज-पूजन का संकल्प लेकर अभिमन्त्रित करते हैं और मध्याह्न के समय उसे शिखर पर चढ़ा दिया जाता है। वर्ष में दो बार—रामनवमी तथा हनुमान-जयन्ती (कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी)—के दिन मन्दिर की ओर से विशिष्ट पूजा आयोजित की जाती है और परिसर में लगे चारों ध्वज बदले जाते हैं।

श्रद्धालुओं के आग्रह पर नया निर्णय

श्री महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल ने बताया कि लंबे समय से अनेक श्रद्धालुओं का आग्रह था कि प्रत्येक पूर्णिमा तथा अन्य विशेष पर्वों के अवसर पर भी मन्दिर के मुख्य शिखर के ध्वज की विशिष्ट पूजा कर उसे बदला जाए। देश के बड़े और प्राचीन मन्दिरों में भी इस प्रकार ध्वज की विशेष पूजा की परम्परा प्रचलित है। महावीर मन्दिर ने इन आग्रहों को ध्यान में रखते हुए तत्काल निर्णय लिया है कि पूर्णिमा के दिन केवल संकल्प न कर, हनुमान-जयन्ती तथा रामनवमी के दिन की तरह विशिष्ट पूजा कर ध्वज परिवर्तन किया जाएगा।

पूजा विधि और समय

यह विशिष्ट पूजा मन्दिर परिसर में स्थित मुख्य ध्वज के निकट आयोजित की जाएगी और पारम्परिक पद्धति के अनुसार लगभग 2 घंटे तक चलेगी। इस अवसर पर श्रद्धालुगण पूजा में भाग लेने के लिए आमंत्रित हैं। इस विशिष्ट पूजा का आयोजन मन्दिर प्रबंधन द्वारा किया जाएगा तथा जिन भक्तों ने इसके लिए शुल्क जमा किया है, उनके नाम पर सार्वजनिक रूप से पूजा संपन्न की जाएगी।

आषाढ़ पूर्णिमा से होगी शुरुआत

यह विशेष ध्वज-पूजा परम्परा इस वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा, यानी 29 जुलाई, 2026 से आरम्भ की जाएगी और भविष्य में प्रत्येक पूर्णिमा को नियमित रूप से आयोजित की जाएगी। मन्दिर प्रबंधन का मानना है कि इस निर्णय से श्रद्धालुओं की आस्था और मन्दिर की आध्यात्मिक परम्परा दोनों को नई ऊर्जा मिलेगी।

(रिपोर्ट: तृप्ति प्रमाण ब्यूरो चीफ विनोद प्रसाद)

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Rajesh