पटना से तृप्ति प्रमाण
बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने के लिए जिला प्रशासन ने 15 दिनों की मोहलत दी है। प्रशासन की ओर से जारी इस नोटिस के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और यह मामला सुर्खियों में बना हुआ है।
10 सर्कुलर रोड: राजनीतिक महत्व का केंद्र
पटना का 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास बिहार की राजनीति का एक प्रमुख केंद्र रहा है। पिछले लगभग दो दशकों से यह आवास राबड़ी देवी और उनके परिवार के अधीन है। अब जब प्रशासन ने आवास खाली करने का नोटिस जारी किया है, तो सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि निर्धारित समयसीमा के भीतर क्या कदम उठाए जाएंगे।
सरकार बनाम विपक्ष: बयानबाजी का दौर
इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। राजद नेताओं का आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है। वहीं, राज्य सरकार का पक्ष है कि सरकारी आवासों का आवंटन और खाली कराना नियमों के तहत होना चाहिए और सभी नागरिकों को कानूनी प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य है।
लालू परिवार का एकजुट रुख, रोहिणी आचार्य की चेतावनी
जब से लालू यादव के परिवार को 10 सर्कुलर रोड वाला आवास खाली करने का नोटिस मिला है, तब से पूरा परिवार एकजुट नजर आ रहा है। इस मामले पर लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार को खुली चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार में हिम्मत है तो जबरन बंगला खाली करवाए। उनका आरोप है कि जनता को मुद्दों से भटकाने के लिए सरकार दबंगई का रास्ता अपना रही है।
पप्पू यादव का निशाना, ‘मां के समान सम्मान’ की अपील
पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने भी इस मामले में बिहार सरकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, “पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी जी आपके लिए भी मां के समान हैं, उनका अपमान मत कीजिए, अहंकार छोड़ दीजिए।” उनके इस बयान ने मामले को और अधिक गरमा दिया है।
फिलहाल की स्थिति: अस्थायी राहत, लेकिन विवाद बरकरार
प्रशासन के इस फैसले से राबड़ी देवी को अस्थायी राहत जरूर मिली है, लेकिन 10 सर्कुलर रोड आवास को लेकर चल रहा विवाद बिहार की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। आगामी दिनों में यह मामला किस करवट बैठता है, यह देखना अब राजनीतिक गलियारों की मुख्य चर्चा बनी हुई है।