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वसई-विरार मनपा में बायो-माइनिंग के नाम पर 64 करोड़ से अधिक के घोटाले का आरोप, भाजपा ने की FIR की मांग |

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बोगस बिल और आरडीएफ परिवहन में फर्जीवाड़े का खुलासा

वसई-विरार शहर महानगरपालिका (VVMC) में पुराने जमा कचरे के प्रसंस्करण और बायो-माइनिंग प्रोजेक्ट के नाम पर 64 करोड़ रुपये से अधिक के कथित घोटाले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। नालासोपारा स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित पत्रकार परिषद में विपक्ष के नेता मनोज पाटील और जिलाध्यक्ष प्रज्ञा पाटील ने गंभीर आरोप लगाए। भाजपा के अनुसार, साई यूटिलिटी कॉन्ट्रैक्टर प्राइवेट लिमिटेड और मनपा अधिकारियों की मिलीभगत से कचरे के वजन और आयतन में हेरफेर कर करीब 39 करोड़ रुपये के बोगस बिल पास कराए गए। आरोप है कि दोपहिया और छोटे वाहनों के फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबर दिखाकर कागजों पर 26 से 27 टन आरडीएफ (RDF) परिवहन का फर्जीवाड़ा किया गया।

17 हजार ब्रास अवैध उत्खनन और 24.64 करोड़ के SLF प्रोजेक्ट पर सवाल

पत्रकार परिषद में भाजपा ने आरोप लगाया कि एमआरएफ परियोजना की आड़ में प्राकृतिक पहाड़ी क्षेत्र में खुदाई कर लगभग 17 हजार ब्रास पत्थर निकाले गए, जिससे पर्यावरण और मनपा को भारी नुकसान हुआ। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2015-2017 के दौरान 24.64 करोड़ रुपये की लागत से शुरू किए गए साइंटिफिक लैंडफिल (SLF) प्रोजेक्ट में भी वित्तीय अनियमितता पाई गई है, जिस पर कैग (CAG) और IIT मुंबई की जांच में गंभीर खामियां उजागर होने के बावजूद कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया गया।

भ्रष्ट अधिकारियों पर FIR और फॉरेंसिक ऑडिट की मांग

भाजपा नेता मनोज पाटील ने मांग की है कि फर्जी बिल बनाने वाले ठेकेदारों, सलाहकारों और संबंधित मनपा अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए। पार्टी ने अब तक हुए पूरे भुगतान का फॉरेंसिक ऑडिट कराने और गबन की गई राशि की वसूली की मांग की है। मांगें पूरी न होने पर व्यापक जनआंदोलन की चेतावनी दी गई है।

(तृप्ति प्रमाण)

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Rajesh